8th Pay Commission News: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर जबरदस्त उत्सुकता है। फिलहाल वेतन संरचना Seventh Central Pay Commission की सिफारिशों के आधार पर चल रही है, लेकिन अब सबकी नजरें नए आयोग पर टिकी हैं। पिछले साल नवंबर 2025 में सरकार ने आठवें वेतन आयोग के टर्म ऑफ रेफरेंस को मंजूरी दी और चेयरपर्सन व सदस्यों की नियुक्ति भी कर दी। पैनल को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए करीब 18 महीने का समय दिया गया है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक सिफारिशें सामने आ सकती हैं। हालांकि लागू होने की सटीक तारीख और एरियर को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा बाकी है।
फिटमेंट फैक्टर क्या हो सकता है?
सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय किया गया था। उस समय न्यूनतम वेतन 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये किया गया। कागजों पर यह बढ़ोतरी बड़ी दिखी, लेकिन असल में इसमें महंगाई भत्ता पहले से शामिल था। फिटमेंट फैक्टर की गणना में दो हिस्से थे—इन्फ्लेशन एडजस्टमेंट (2.25) और रियल पे हाईक (0.32)। 1 जनवरी 2016 तक 125% महंगाई भत्ता जुड़ चुका था, जिसे बेसिक में मर्ज करने पर 2.25 का फैक्टर बना। इसके ऊपर करीब 14% की वास्तविक वेतन वृद्धि जोड़कर कुल 2.57 किया गया। अब सवाल है कि 8वें वेतन आयोग में यह फैक्टर 3.00 या उससे ऊपर जाएगा या नहीं—इस पर कर्मचारी संगठन लगातार दबाव बनाए हुए हैं।
एरियर और बढ़ा हुआ वेतन कब?
कर्मचारियों को उम्मीद थी कि जनवरी 2026 से नया वेतनमान लागू हो जाएगा, लेकिन अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों के बाद ही होगा। अगर लागू करने में देरी होती है, तो एरियर मिलने की संभावना बनती है। हालांकि यह पूरी तरह सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा। साफ शब्दों में कहें तो अभी सस्पेंस कायम है—न लागू होने की तारीख तय है, न एरियर की राशि।
CGHS में बड़े बदलाव की मांग
8वें वेतन आयोग के साथ एक और बड़ा मुद्दा जुड़ा है—Central Government Health Scheme यानी CGHS। यह योजना केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा की रीढ़ मानी जाती है। जिन शहरों में CGHS सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां कर्मचारियों को फिलहाल 1,000 रुपये मासिक भत्ता मिलता है। 25 फरवरी 2026 को नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड) की बैठक में इसे बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह करने की मांग उठी है। बढ़ती इलाज लागत, महंगी दवाइयों और सुपर-स्पेशलिटी उपचार के खर्च को देखते हुए यह मांग जोर पकड़ रही है।
संभावित सुधार और आगे की राह
CGHS के तहत कैशलेस इलाज, ओपीडी, दवाइयां और डायग्नोस्टिक सेवाएं मिलती हैं, लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि पैनल अस्पतालों की संख्या बढ़ाई जाए और पैकेज रेट समय-समय पर अपडेट हों। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, ई-रिफरल सिस्टम और बुजुर्ग पेंशनरों के लिए टेलीमेडिसिन जैसी सुविधाओं को और मजबूत करने की जरूरत है।
सरकार ने आठवें वेतन आयोग की वेबसाइट भी लॉन्च कर दी है और हितधारकों से 18 अहम सवालों पर सुझाव मांगे हैं। कुल मिलाकर, 8वां वेतन आयोग सिर्फ सैलरी बढ़ोतरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्वास्थ्य, प्रशासनिक सुधार और टेक्नोलॉजी अपग्रेड जैसे मुद्दों पर भी बड़ा असर डाल सकता है। अब सबकी नजर अंतिम सिफारिशों और सरकार की मुहर पर टिकी है।
