Mp News: भोपाल से आई खबर के अनुसार मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने परीक्षा, संबद्धता, नवीनीकरण और डुप्लीकेट अंकसूची सहित विभिन्न शुल्कों में 25 से 80 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है। मंडल द्वारा जारी आदेशों के बाद प्रदेश के लगभग 40 लाख विद्यार्थियों पर सीधा आर्थिक प्रभाव पड़ेगा। फीस वृद्धि का कारण परीक्षाओं में किए जा रहे नवाचार और प्रशासनिक खर्च को बताया गया है।
डीएलएड की पढ़ाई अब होगी महंगी
प्राथमिक शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए डीएलएड (डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन) पाठ्यक्रम अब पहले की तुलना में महंगा हो जाएगा। मंडल ने डीएलएड संस्थानों के संबद्धता शुल्क में 50 हजार रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। पहले जहां संबद्धता के लिए डेढ़ लाख रुपये देने होते थे, अब यह राशि बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दी गई है।
संस्थान प्रबंधन का कहना है कि बढ़ा हुआ खर्च अंततः विद्यार्थियों पर ही डाला जाएगा, जिससे पाठ्यक्रम की वार्षिक फीस में वृद्धि होना लगभग तय है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 30 हजार विद्यार्थी इस पाठ्यक्रम में अध्ययनरत हैं।
परीक्षा शुल्क में भी इजाफा
मंडल ने डीएलएड परीक्षा शुल्क में भी संशोधन किया है। नियमित विद्यार्थियों को सभी विषयों के लिए सात हजार रुपये देने होंगे। द्वितीय अवसर के तहत दो विषयों तक तीन हजार, चार विषयों तक पांच हजार और चार से अधिक विषयों के लिए सात हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।
इसके अतिरिक्त हाईस्कूल और हायर सेकंडरी की नई संबद्धता तथा नवीनीकरण शुल्क में भी वृद्धि की गई है। 10वीं और 12वीं की संबद्धता के लिए सरकारी और निजी विद्यालयों की फीस अलग-अलग तय की गई है, जिसमें निजी विद्यालयों पर अधिक शुल्क लगाया गया है।
नवाचार का तर्क, बढ़ता आर्थिक दबाव
मंडल के अधिकारियों का कहना है कि परीक्षाओं में तकनीकी सुधार, पारदर्शिता और अन्य नवाचारों पर खर्च बढ़ने के कारण यह निर्णय लिया गया है। हालांकि अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए यह बढ़ोतरी चिंता का विषय बन गई है।
शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती लागत के बीच अब यह देखना होगा कि सरकार विद्यार्थियों को राहत देने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था करती है या नहीं। फिलहाल, फीस वृद्धि का असर सीधे तौर पर विद्यार्थियों और शैक्षणिक संस्थानों दोनों पर पड़ने वाला है।
