Mp Pensioners Latest News: भोपाल से बड़ी खबर यह है कि मध्य प्रदेश के करीब 4.40 लाख पेंशनरों में इन दिनों नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। कारण है—एक जनवरी 2026 से महंगाई राहत (DR) में सिर्फ 3 प्रतिशत वृद्धि और वह भी देरी से लागू होना। पेंशनर्स संगठनों का कहना है कि जब कर्मचारियों को समय पर लाभ दिया जा सकता है तो पेंशनरों को क्यों टालमटोल? इसे उन्होंने साफ तौर पर भेदभाव बताया है।
कर्मचारियों को पहले फायदा, पेंशनरों को इंतजार क्यों?
पेंशनरों का तर्क सीधा है। राज्य सरकार ने शासकीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता जुलाई 2025 से बढ़ाया और आठ महीने का एरियर छह किस्तों में देने का फैसला भी कर लिया। लेकिन पेंशनरों को वही लाभ छह महीने बाद देने की बात कही जा रही है। उनका कहना है कि महंगाई का असर रसोई गैस, दवाइयों, बिजली-पानी और रोजमर्रा की जरूरतों पर समान रूप से पड़ता है। फिर राहत देने में अलग-अलग समय सीमा क्यों? इसी सवाल ने 4.40 लाख पेंशनरों के बीच असंतोष को हवा दी है।
संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप
पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बयान जारी कर कहा कि कर्मचारियों और पेंशनरों के बीच इस तरह का अंतर उनके अधिकारों का हनन है। उनका मानना है कि महंगाई राहत कोई “अनुग्रह राशि” नहीं, बल्कि सेवा के बदले मिलने वाला वैधानिक अधिकार है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि 81 महीनों के एरियर का भुगतान अब तक लंबित है। इससे बुजुर्ग पेंशनरों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता दिखानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
पेंशनर्स संगठनों ने हाल में आए सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय का जिक्र करते हुए कहा कि अदालत ने साफ किया है—महंगाई राहत में मनमानी कटौती या देरी उचित नहीं है। अदालत ने इसे पेंशनरों का अधिकार माना है, न कि कोई बोनस। संगठन का कहना है कि जब देश की सर्वोच्च अदालत इस विषय पर स्पष्ट रुख रख चुकी है, तो राज्य सरकार को भी उसी भावना के अनुरूप निर्णय लेना चाहिए।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
पेंशनर्स संगठनों ने मुख्यमंत्री से सीधा हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि कर्मचारियों और पेंशनरों के बीच जो असमानता दिख रही है, उसे तुरंत खत्म किया जाए। साफ है कि मामला अब सिर्फ 3 प्रतिशत बढ़ोतरी का नहीं, बल्कि सम्मान और समान अधिकार का बन गया है। आने वाले दिनों में सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है, इस पर 4.40 लाख पेंशनरों की नजर टिकी हुई है।
